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Friday, 6 September 2013

मेरे छोटे भाई की वाइफ़

निशा मेरे छोटे भाई रुपम की वाइफ़ है। निशा काफ़ी सुंदर महिला है। उसका बदन
ऊपरवाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है। मैं शिवम उसका जेठ हूं। मेरी
शादी को दस साल हो चुके हैं। निशा शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी।
मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी। रुपम एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता
था। हां बताना तो भूल ही गया निशा का मायका नागपुर में है और हम जालंधर
में रहते हैं।

आज से कोई पांच साल पहले की बात है। हुआ यूं कि शादी के
एक साल बाद ही निशा प्रिग्नेंट हो गयी। डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी
हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी
वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी। रुपम तुरंत छुट्टी लेकर
नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था।
डिसाइड ये हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी। एक महीने
के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आयी तो रुपम को छुट्टी नहीं मिली।
निशा को लेने जाने के लिये रुपम ने मुझे कहा। सो मैं निशा को लेने ट्रैन
से निकला। निशा को वैसे मैने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस
यात्रा मे हम दोनो में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में
घूमने वाली निशा बेपर्दा हो गयी।
हमारी टिकट 1st class में बुक थी। चार
सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रैन में चढ़ गये। गरमी के दिन
थे। जब तक ट्रैन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी
थी। मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा,
"अब
आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप
अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।" मैं उसकी बात पर हँस पड़ा।
"मैं
भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।" मैने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे
को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया। अचानक मेरे मुंह से
निकला
"अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे
लगता।" उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी। उसने बोतल ग्रीन रंग की
एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था। गर्मी के कारण
बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया। तब मैने जाना कि
उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नही पहनी हुई है। उसके स्तन दूध से भरे हुए थे
इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे। ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी
आधी छातियां साफ़ दिख रही थी। पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण
निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था। मेरी नजर उसकी
छाती से चिपक गयी। उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी
नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शर्मा
गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया। हम दोनो बातें करते हुए जा रहे थे।
कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका
चेहरा थोड़ा गम्भीर था। हम वापस बात करने लगे। कुछ देर बाद वो वापस उठी और
कुछ देर बाद लौट कर आ गयी। मैने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने
हाथो से अपने ब्रेस्ट को हलके से दबा रही है।
"कोई प्रोब्लम है क्या?' मैने पूछा।
"न।।नहीं" मैने उसे असमंजस में देखा। कुछ देर बाद वो फिर उठी
तो मैने कहा "मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?"
वो
झिझकती हुई सी खड़ी रही। फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी। कुछ देर बाद वापस
आकर वो सामने बैठ गयी।"मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।" उसने चेहरा ऊपर
उठाया तो मैने देखा उसकी आंखें आंसु से छलक रही हैं।"क्यों क्या हुआ" मर्द
वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं। मेरी भी समझ में नहीं
आया अचानक उसे क्या हो गया।"जी वो क्या है म्म वो मेरी छातियां भारी हो
रही हैं।" वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ
था।" म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।"
उसने नजरें नीची करते हुए कहा।"बाथरूम जाना है?" मैने पूछा"गयी थी लेकिन
वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली अयी" उसने कहा "और बाहर के
वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?" "फ़िर क्या
किया जाए?" मैं सोचने लगा "कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर
सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई
बर्तन भी नही है जिसमें दूध निकाल सको"उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक
नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई
बोली, "अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?""बोलो""आप इन्हें खाली कर
दीजिये न""मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।" मैने उसकी छातियों को
निगाह भर कर देखा।"आप अगर इस दूध को पीलो……"उसने आगे कुछ नहीं कहा। मैं
उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया।"लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे
छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं""जी
आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक
नहीं है।?" उसने मुझसे कहा "मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के
बारे में सोच रहे हो। प्लीज़।"मैं चुप चाप बैठा रहा समझ में नहीं आ रहा था
कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक
बड़ी बात थी। उसने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये।"प्लीज़" उसने फ़िर कहा
लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।"जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं
है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही
जाउं।" कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल
के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से
उसके मुंह से चीख निकल गयी "आआह्हह्ह" ।मैने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से
बाहर निकाल दिये। फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया। उसने
मेरी तरफ़ देखा। मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और
उसके बगल में आ गया। उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया। उसके नग्न ब्रेस्ट जो
कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये
बेताब थे। मैने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए
निप्पल के ऊपर लाया। मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़
के हो गये। मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे
हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उसने मेरे बालों को सहलाते हुए
अपने स्तन को नीचे झुकाया। उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था। मैने
जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।"ऊओफ़्फ़फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ। पलेअसे इनका
रस चूस लो।" कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया। मैने अपने
होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा। मीठे दूध की
एकतेज़ धार से मेरा मुंह भर गया। मैने उसकी आंखों में देखा। उसकी आंखों में
शर्म की परछाई तैर रही थी। मैने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले
के नीचे उतार दिया।"आआअह्हह्हह" उसने अपने सिर को एक झटका दिया।मैने फ़िर
उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया। मैं उसके दूसरे निप्पल
को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।"ऊओह्हह ह्हह्हाआन्न हाआन्नन जोर से चूसो
और जोर से। प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ। काफ़ी खुजली हो रही है।"
उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी। मैने दांतों से
उसके निप्पल को जोर से दबाया।"ऊउईईइ" कर उठी। वो अपने ब्रेस्ट को मेरे
चेहरे पर दबा रही थी। उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे
बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये। वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने
लगी। फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा। "क्या कर रही हो?"
मैने उससे पूछा।"वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ" उसने कहा"क्या कर रहा हूं
मैं तुम्हारे साथ" मैने उसे छेड़ा"दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के
स्तनों से""काफ़ी मीठा है""धत" कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये
और मेरे चेहरे पर झुक गयी। इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने
झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे
दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया। फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को
मेरे लिप्स पर रख दी। मैने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का
एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया। वापस उसके दूध को चूसने लगा। कुछ देर बाद
उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो
सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।"अब दूसरा"मैने उसके स्तन को
मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस
स्तन को पीने लगा। उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे। हम दोनो ही
उत्तेजित हो गये थे। उसने अपना हाथ अगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख
दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से
दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।"काफ़ी तन रहा है" उसने शर्माते हुए
कहा।"तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो
विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।""म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल
हैं" उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा"तुम इतने कातिल मूड में हो
तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है" उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर
ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा "देखूं तो सही
कैसा लगता है दिखने में"मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुयी। "अरे बाप
रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती है इसे?""आ जाओ तुम्हें भी
दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।""धत् मुझे नहीं देखना कुछ। आप
बड़े वो हो" उसने शर्मा कर कहा।लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं
की।"इसे एक बार किस तो करो" मैने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते
हुए कहा। उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये। अब तक उसका
दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल
छूट गया। मैने उसके सिर को हलके से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर
मेरे लिंग को जगह दे दी। मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया। उसने दो तीन
बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।"ऐसे
नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है""हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा
देना चाहिये" मैने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया। मैने उठकर अपने कपड़े
उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके
बदन से अलग कर दिया। अब हम दोनो बिल्कुल नग्न थे। तभी किसी ने दरवाजे पर
नोक किया। "कौन हो सकता है।" हम दोनो हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली
में भर लिये और निशा बर्थ पर सो गयी। मैने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल
दी। इस बीच दो बार नोक और हुअ। मैने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था। उसने
अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा "ये दोनो सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें
तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं" और बाहर चला गया। मैने दरवाजा बंद किया
और निशा के बदन से चादर को हटा दिया। निशा शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को
और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। मैने उसके हाथों को पकड़ कर
हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा "प्लीज़ मुझे शर्म आ रही
है।" मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा। इससे मेरा लिंग
उसके मुंह के ऊपर था। उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह
में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।
"आह विशाल जी
क्या कर रहे हो मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर
अपनी जीभ नहीं डाली" उसके पैर छटपटा रहे थे। उसने अपनी टांगों को हवा में
उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी। मैं उसके
मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। मेरे हाठ उसकी योनि की फ़ांकों को
अलग कर रखे थे और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह
में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। काफ़ी देर तक इसी
तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनो एक
साथ खल्लास हो गये। उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था। उसके मुंह से चू
कर मेरा रस एकपतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके
बालों में जाकर खो रहा था। मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।
हम दोनो एक दम नग्न थे और दोनो के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनो एक दूसरे
से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग
होने की कसम खा ली हो। कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते
रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।"अब आ जाओ" मैने निशा को
कहा।"जेठजी थोड़ा सम्भाल कर। अभी अंदर नाजुक है। आपका बहुत मोटा हैकहीं कोई
जख्म न हो जाये।""ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे
ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।"निशा उठकर बर्थ पर चौपाया
हो गयी। मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हलका सा धक्का मारा।
गीली तो पहले ही हो रही थी। धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस
गया। एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी। वो दर्द से
"आआह्हह" कर उठी। मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा। कुछ देर
बाद जब दर्द कम हुआ तो निशा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड
पूरा अंदर चला जाये।"डालो न रुक क्यों गये।""मैने सोचा तुम्हें दर्द हो
रहा है इसलिये।""इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है
दर्द तो करेगा ही।" उसने कहा। फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी
कमर को आगे पीछे करने लगी। मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार
रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के से
उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे। मैने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके
स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया। लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ
उसके दूध की धार से भीग जाती। काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने
अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।"आआह्हह्ह शीईव्वव्वाअम्मम
आआअह्हह्ह तूउम्म इतनीए दिन कहा थीए। ऊऊओह्हह माआईईइ माअर्रर्रर जाऊऊं
गीइ। मुझीए माअर्रर्रर डालूऊओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लूऊ" और उसकी योनि में
रस की बौछार होने लगी। कुछ धक्के मारने के बाद मैने उसे चित लिटा दिया और
ऊपर से अब धक्के मारने लगा।"आअह मेरा गला सूख रहा है।" उसका मुंह खुला हुआ
था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी। मैने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई
और उसे दो घूंठ पानी पिलाया। उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस
किया।"चोदो शिवम चोदो। जी भर कर चोदो मुझे।" मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा।
काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि
से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।"आजा मेरे उपर" मैने
निशा को कहा। निशा उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के
दोनो ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर
बैठ गयी। अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी। मैने उसके निप्पल को पकड़ कर
अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी। मैने उसके निप्पल को सेट कर के
दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और मैं
उसका दूध निचोड़ रहा था। काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी "शिवम मेरे
निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।" हम दोनो साथ
साथ झड़ गये। काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसे लेती
रही। फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी। हम दोनो
लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे। लेकिन उसने दोबारा
मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया, उसके बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो
रहा था। लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया। "आज तो मैं आपको और नहीं दे सकुंगी
लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लुंगी अपने अंदर। और हां
अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनो भाईयों में से किसका बच्चा आता है।
उस यात्रा के दौरान कई बार मैने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया।

Sunday, 25 August 2013

Shadi Ke Mahol MAi chudai

Main 36 saal ka naujawan hoon. Sundar ladki ko dekhkar mujhe accha lagta hai. Chodne ki icchha ho jaati hai. Man karta hai uske narm narm gaalon ko choon loon aur uske hothon ko choos loon. Apni baahon mein bharkar uski chuchiyon ko dabaa doon aur apne lund ko uske bur mein daal kar chod daaloon. Shaadiyon ke din the aur shaadi ka maahaul tha. Mere teesre chhote sale ki shaadi thi aur humlog sasural mein ikattha hue. Kaafi log hone ki vajah se har kamre mein kai logon ka intezam tha.

Meri salej yaani pehle sale ki biwi ka naam tha Sarla. Gehua rang, bhara hua badan, 34 26 34 ke aankre jaisa, gadrayee jawani aur gazab ki sundar. Iccha karti ki daboch kar bas chaba hi daloon. Ithlati hui jab chalti apni saari ko saamne haath se choot ke paas sambhalti hui tab man karta ki bas iski garm choot ko kyon na main hi pakad loon aur masalta rahoon. Saari se voh apni mast aur tanee hui chuchiyon ko bharsak dhakti rehti lekin voh bagal se blouse ke madhyam dikhta rehta. Jhuki hui nigahon se dekhti aur muskara deti. Hamara lauda aur khada ho jaata. Shaam ke kareeb 4 baje the aur main uski taraf dekhe jaa raha tha.Tabhi khilkhilati hui boli, “Kyon Jeejaji, kya chahiye ?” Mere muh se nikal pada, “Tum.” Chaunk kar boli, “Kya kaha ?” Maine jawab diya, “Mera matlab tumhare haath ki ek cup chai.”Chai peekar jaise taise shaam gujri aur raat hui. Ek kamre mein upar palang par mardon ko sone ke liye kaha gaya aur theek niche zameen par aurton ke liye gadde lagaye gaye. Kismat dekhiye palang ke jis kinare par main tha, theek uske niche zameen par sabse pehle Sarla ka bistar tha. Man mein badi gudgudi ho rahi thi. Lund tha ki uthe ja raha tha. Maine thaan liya ki bacchhu aaj na chookna. Bas mauka dekh kar pahal kar hi dena. Phir socha ki ek baar toh to lekar dekhoon. Maine Sarla se poocha, “Sarla, ye mera takeeya ekdum kinare mein kyon rakh diya. Palang par beech mein rakhti.” Voh boli, “Kyon aap karvat bahut jyada lete hain ?” Phir aahiste se boli, “Please aap mere upar mat gir jayeega.” Doston, uska yeh bolne ka andaz aisa tha ki koi bevkoof hi samajh na paye. Phir kya tha, maine chadar taani, lund haath mein liya, aur lete hue sabke sone ka intezar karne laga.
Aakhir raat kuch gujri aur thake hue sabhi log ek ek kar gehri neend mein so gaye sivay mere aur Sarla ke jo ki main jaanta tha. Himmat juta kar main aahista se upar palang ke kinare se utar kar niche zameen par Sarla ke bagal mein let gaya. Kamre mein pehle se hi andhera tha. Maine pehle uski chadar aahista se thodi si apne upar le li aur apne badan ko usse sataya mano keh raha hoon ki main aa gaya. Voh chupchaap rahi aur meri himmat badhi.Maine apna haath ab dheere se uske kamar par rakha aur uski naram lekin garm garm nightie par sarkaate hue uski chuchi par rakh diya. Voh kuch nahi boli. Maine ab uski chuchi ko dabaya. Voh shaant rahi. Aur main madhosh hone laga. Lund khushi ke mare phadphadane laga. Lund ko maine uski gaand se chipka diya. Aur haath se doosri chuchi ko dabane laga. Chahat badhi aur maine apne haathon se uski nightie ko upar uthaya. Ab mera haath uske badan par tha. Haath ko upar late hue aur uske narm narm badan ka maza lete hue maine uski nangi chuchiyon ko chooa. Gol aur ekdum sakht. Narm lekin garam. Nipple ko dabaya aur kaskas kar ab main chuchiyon ko daba raha tha. Hothon se main uske gardan ko choomne laga. Ab lund chodne ke liye betaab hua ja raha tha. Aakhir kab tak sehta. Koi aawaz bhi nahi kar sakte the.Ek haath maine uski gardan ke niche se ghusakar uski tani hui chuchi par rakha aur doosra haath maine sarkate hue uski choot par rakh diya. Choot par ghane baal the lekin phir bhi ekdum gili thi. Yaani chudwane ke liye taiyar. Lund to bur mein ghusne ke liye betaab tha hi. Maine apni ungli uske bur ke daraar ko choote hue andar ghusa di. Usne ek aah si bhari. Voh bhi chudwane ko ekdum taiyar thi.Uske kaan ke paas muh le jaakar maine fusfusakar kaha, “Main bathroom Ja raha hoon, tum thodi der baad dheere se aa jao jaaneman.” Aahista se uthkar dabdabe pao se main bathroom ke andar ghus gaya aur darwaza halka sa khula rakh intezar karne laga. Paanch minute baad Sarla aayee aur jaise hi andar ghusi maine darwaza band kar chitkani laga di. Ab kya tha. Mano sahansheelta ka baandh bas toot gaya. Maine kas kar use apni bahon mein bhara aur apne hoth uske dhadhakte hothon par rakh zor zor se choosne laga. Kya hoth the. Jaise gulab ki pankhdiyan. Aisa taste ki bas nasha aa gaya. Ek haath se maine uske baal pakad rakhe the choomte hue aur doosre haath se main uski chuchiyon ko nightie ke upar se hi masal raha tha. Mera lund pajama ke andar ekdum khara hua pareshaan ho raha tha. Excitement hone ke baad kapda bahut bure lagta hain. Nanga badan hi acchha lagta hai. Maine turant apne pajame ka naada khol use hataya. Underwear nikal phenka. Teeshirt utar nanga ho gaya.Uski nightie ke button ko saamne se kholna shuru kiya. Jaldi se uske badan se nightie nikali, bra ke hook ko piche se khola, aur choomte hue dabate hue, kas kas kar ek doosre ko masalte hue pehle besabri se uski nangi aazad chuchiyon ko haath mein le liya. Sakht bhi thi aur naram bhi thi. Garam bhi thi aur tight gol gol bhi thi. Kya kahoon bas gazab ki chuchiyan thi. Dabao to chitak chitak jaye. Lekin bahut bahut maza aaye. Gehri gulabi rang ki nipples ke charo taraf brown rang ka golnuma rose. Sugandh jo uske sharer se aa rahi thi, aur bhi madhosh kiye ja rahi thi. Sex ka sugandh bola nahi ja sakta. Bas enjoy kiya ja sakta hai. Voh ab bhi poori tarah se nangi nahi thi. Nylon ka tight underwear uske bur ko chupaye hue tha. Use jab hatay to Sarla kaafi shrma gayee aur apna muh meri chhati mein chupa liya. Mera lamba aur fadfadata hua lund uske badan ko choot ke aas paas choota ja raha tha. Maine uske thodi ko haathon se uthaya apni aankhon ki taraf. Usne apni aankhen band kar li.
Maine use palkon ke upar chooma. Deewar ke sahare apne lund ko uski choot ke against dabaya. Uske hothon ko choosa aur choosta hi raha. Uski nangi gol gol mulayam garam sakht sexy chuchiyon ko khoob dabaya aur masla. Aakhir raha nahi gaya aur uski chuchi ko nipple sahit apne muh mein bhar liya. Uski dahini chuchi masalte hue, uski left chuchi ko main taste le kar choos raha tha. Mujhse aur raha nahi gaya. Maine maza lene ke liye usse poocha, “Sarla raani, tum itne din tak kaha chupi thi ? Chod doon ?” Usne ek haath se meri peeth ko apni taraf daba rakha tha aur doosre haath se mere lund ko apne mulayam haathon se pakadkar boli, “Jeejaji, jo bhi karna hai, jaldi se kijiye.” Maine kaha, “Kya karoon ? Bolo na, jaan. Tum to ekdum malai ho malai.” Usne jhat se jawab diya, “Kha jayeeye na.” “Kya kya khaaon raani. Tum badi mast cheez ho yaar.” Usne shararati baton ka maza lete hue kaha, “Jeejaji jaldi se ghusa dijiye na.” Maine aur maza lete hue uske kaan ke paas fusfusakar kaha, “Kya ghusaaon aur kahan.” Boli, “Dhat, aap bahut badmaash hain. Main ja rahee hoon.”Maine kas kar pakad to rakha hi tha. Inhi baton mein hum ek doosre ke badan se lipat lipat kar pata nahi kya kya kar rahe the. Bas kuch na kuch pakda pakdi masla masli choosa choosi chal rahi thi. Aakhir maine kaha, “Raani, ek baar kehna padega. Sirf ek baar. Please.” Poochne lagi, “Kya kahoon jeeju ?” Maine maza lete hue kaha, “keh do ki mere bur mein lund daal kar chod dijiye na.” Usne sharmmane ke andaz se kaha, “Chodiye na, jeeju. Aur mat tadpaiye.” Maine bhi dekha ki ab jyada der karne mein risk hai. Maine apna lund uske bur ke daraar par ragadte hue ek dhakka lagaya. Lund andar ghus to gaya lekin maza nahi aaya. Chudai ka maza tabhi hai jab aurat ko lita kar choda jaaye. Bathroom ke farsh par maine Sarla ko litaya aur uske upar chadh gaya. Tangon ko failakar apna lund uake bur par rakha aur ghusaya. Usne bhi thodi si mada ki aur apne bur se mere lund ko samet liya. Hoth chooste hue, chuchiyon ko dabate hue maine chodna shuru kiya. Voh bhi niche se gaand utha utha kar chudwane lagi.Kya cheez banai hai upar waale ne yeh chudai. Bahut bahut maza aata hai. Jisne chudai ki hai use yeh padhkar mehsoos ho raha hoga ki hum dono kitna swaad le rahe honge chudai ka. Beech beech mein chodte hue, uski chuchi ko choos bhi raha tha. Chudai lambi rakhne ke liye maine speed medium hi rakhi. Chuchi chooste hue aur bhi kam. Aakhir mein lund Ne jab signal diya ki ab main jahdne vaala hoon, tab maine kas kas kar chudai ki. Chodta raha, chodta raha, strokes pe strokes lagata raha. Aur voh uchal uchal kar chudwai ja rahi thi. Aisa anand aa raha tha ki maloom hi nahi pada ki hum dono kab ek saath jhad gaye. Jaldi se humne kapde pehne aur bahar nikalne ke pehle maine Sarla ko kas kar apni bahon mein jakda aur choomte hue kaha, “Salej Sahiba, vada karo jab bhi mauka milega to chudwaogi.” “Aap bahu paaji hai” keh kar voh dabe pao chali gayee.

Friday, 23 August 2013

शरीफ लड़का

मेरा नाम आशीष है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। मैं एक मध्यम परिवार का
शादीशुदा मर्द हूँ, मेरा भी मन करता था कि मैं भी किसी के साथ सम्भोग करुँ।
कोई ऐसी लड़की मिल जाये जो मुझे प्यार करे, जिसके साथ मैं खुल कर बातें कर
सकूं और अपने मन की बात कह सकूँ।
दोस्तो और सहेलियो, अब आप मेरी कहानी सुनिए :


मैं एक बहुत ही शरीफ लड़का था, मेरी शादी को बारह साल हो चुके थे। मैंने अपनी
पत्नी के अलावा और किसी भी लड़की की तरफ कभी आँख उठा करके भी नहीं देखा था।
करीब गयारह साल के बाद मेरी भी इच्छा हुई कि मेरी भी कोई दोस्त होती जिसे मैं
भी आराम से चोद सकता और वो मुझसे चुदाई करवा के खुश हो जाती।

मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई जो कि मेरी हम-पेशा है। मैं उसका नाम नहीं बता
सकता (कृपया मुझे माफ़ करें) हम लोग करीब साल भर बात ही करते रहे, न मैंने
पहल की और न ही उसने कभी कहा कि उसका मन मुझसे मिलने को कर रहा है।

वो भी शादीशुदा है और मैं भी !

हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी है, पर पिछले साल अचानक उसने मुझ से कहा कि
वो मुझसे अकेले में मिलना चाहती है। मैं तो पहले से ही तैयार था पर डरता था
कि कहीं वो गुस्सा न हो जाये। उसके कहने पर तो जैसे मुझे मन मांगी मुराद ही
मिल गई हो।

मैंने तुंरत उसे फ़ोन करके पूछा- बताओ कहाँ चलें?

तो उसने कहा- जहाँ आपको अच्छा लगे, वहीं चलते हैं, लेकिन जल्दी वापिस आना
होगा !

मैंने कहा- ठीक है !

मैंने तुंरत अपनी कार निकाली, उसे जहाँ उसने कहा था, वहां से लिया और चल पड़े
! मैं कभी बाहर नहीं गया था, मैंने अपने एक दोस्त को फ़ोन किया (जो हर हफ्ते
अपनी गर्ल फ्रेंड को लेकर जाता है ) और उसे कहा कि मेरे लिए एक कमरा बुक करवा
दो !

उसने होटल में फ़ोन किया, उसके दो मिनट बाद ही हम वहां पहुँच गए और मैनेजर से
बात करके कमरे में चले गए। कमरे में जाते ही हमने अन्दर से बंद कर लिया और
जोर से जफ्फी डाली जैसे दो साथी जनम-जनम से बिछडे पता नहीं कितनी देर बाद
मिले हों !

इसके बाद हम दोनों ने आपस में मुँह में मुँह डाल कर किस किया और जाने कब तक
करते रहे।

फ़िर उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया। मैं तो सोच भी
नहीं सकता था कि वो मुझे इस तरह का मज़ा देगी। उसने मेरे पूरे के पूरे लण्ड को
अपने मुंह में भर लिया। मुझे तो बस कुछ मत पूछो कि कितना मज़ा आया ! बता ही
नहीं सकता !

थोड़ी देर चूसने के बाद उसने अपनी चूत की तरफ इशारा करके कहा- अब अपना लण्ड
इसमें डालो ! पता नहीं कब से प्यासी है यह तुम्हारे लण्ड के लिए !

मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत पर लण्ड रखा और अन्दर डालने लगा तो ऐसे
लगा थोड़ी टाइट है, मैंने उससे पूछा- क्या बात है? चूत बहुत टाइट है? (उसके दो
बच्चे हैं)

तो उसने कहा- बहुत दिनों से प्यासी है चूत तुम्हारे लण्ड के लिए ! जल्दी डालो
! लेकिन आराम से ! नहीं तो दर्द होगा !

मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए उसे
मेरे लण्ड की बहुत जरुरत है। मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत में डाला। मेरा
लण्ड बहुत ही टाइट जा रहा था उसकी चूत में ! मेरा लण्ड 7" का है और 3" मोटा
है,

उसने कहा- तुम्हारा तो बहुत मोटा है !

तो मैंने कहा- कोई बात नहीं ! तुम्हारे अन्दर फिट हो जायेगा !

मैंने जैसे ही उसकी चूत में अपना लण्ड डाला, वो चिल्लाने लगी- थोड़ा आराम से
करो न ! बहुत दर्द हो रहा है !

मैंने कहा- कोई बात नहीं मेरी जान ! चिंता मत करो ! सब ठीक हो जायेगा !

और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर लण्ड उसकी चूत में रहा तो वो कहने लगी- अब
करो न प्लीज़ !

तो मैंने उससे पूछा- अब दर्द कैसा है?

तो उसने कहा- प्लीज़ जल्दी करो ! मेरी चूत को फाड़ डालो ! जल्दी करो ! मेरी
चूत को मसल डालो !

तो मैंने अपना काम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही वो झड़ गई लेकिन मेरा अभी
तक नहीं हुआ था। (दोस्तों मैं आप को बात बता दूं कि मेरा तब तक नहीं होता जब
तक मैं नहीं चाहता, यह मेरा अनुभव है)

फिर मैंने उसे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।

वो बोली- आप बहुत जोर से करते हो और बहुत ज्यादा करते हो ! क्या खाते हो ?

तो मैंने कहा- मैं तो सिर्फ दूध ही पीता हूँ ! और वो भी दो थन वाली गौ का !

वो बोली- धत्त ! बेशरम ! चलो अब जल्दी करो !

मुझे भी जल्दी थी क्योंकि इस बीच मेरे पास दो तीन फ़ोन आ गए थे कि कहाँ हो ?

तो मैंने जल्दी-जल्दी जोरदार शॉट लगाये और 40-50 शॉट लगा के मैं भी झड़ गया।
मैंने अपना सारा रस उसकी चूत में ही डाल दिया और 5 मिनट उसके ऊपर ही लेटा
रहा। मैं पसीने से नहा गया था। उसने मेरे बदन से पसीना पौंछा और खड़ी हो गई।

मैंने उससे पूछा- कैसे लगा?

तो उसने कहा- आप बहुत जोर से करते हो और बहुत समय लगाते हो !

मैंने पूछा- मज़ा आया या नहीं ?

तो उसने कहा- मज़ा तो बहुत आया ! मैं पूरी तुम्हारी हो गई हूँ।

अब तक हम बहुत बार मिल चुके हैं, एक दो बार वो गर्भवती भी हो गई । अब
हम जब भी मिलते हैं तो कंडोम इस्तेमाल करते हैं ताकि कोई खतरा न रहे।

चालीस की उम्र

मैं अपनी चालीस की उम्र पार कर चुकी थी। पर तन का सुख मुझे बस चार-पांच साल
ही मिला। मैं चौबीस वर्ष की ही थी कि मेरे पति एक बस दुर्घटना में चल बसे थे।
मेरी बेटी की शादी मैंने उसके अठारह वर्ष होते ही कर दी थी। अब मुझे बहुत
अकेलापन लगता था।
पड़ोसी सविता का जवान लड़का मोनू अधिकतर मेरे यहाँ कम्प्यूटर पर काम करने आता
था। कभी कभी तो उसे काम करते करते बारह तक बज जाते थे। वो मेरी बेटी वर्षा के
कमरे में ही काम करता था। मेरा कमरा पीछे वाला था ... मैं तो दस बजे ही सोने
चली जाती थी।

एक बार रात को सेक्स की बचैनी के कारण मुझे नींद नही आ रही थी व इधर उधर
करवटें बदल रही थी। मैंने अपना पेटीकोट ऊपर कर रखा था और चूत को हौले हौले
सहला रही थी। कभी कभी अपने चुचूकों को भी मसल देती थी। मुझे लगा कि बिना
अंगुली घुसाये चैन नहीं आयेगा। सो मैं कमरे से बाहर निकल आई।
मोनू अभी तक कम्प्यूटर पर काम कर रहा था। मैंने बस यूं ही जिज्ञासावश खिड़की
से झांक लिया। मुझे झटका सा लगा। वो इन्टरनेट पर लड़कियों की नंगी तस्वीरें
देख रहा था। मैं भी उस समय हीट में थी, मैं शान्ति से खिड़की पर खड़ी हो गई और
उसकी हरकतें देखने लग गई। उसका हाथ पजामे के ऊपर लण्ड पर था और धीरे धीरे उसे
मल रहा था।
ये सब देख कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरे हाथ अनायास ही चूत पर चले गये, और
सहलाने लग गये। कुछ ही समय में उसने पजामा नीचे सरका कर अपना नंगा लण्ड बाहर
निकाल लिया और सुपाड़ा खोल कर मुठ मारने लगा। मन कह रहा था कि तेरी प्यासी
आंटी चुदवाने को तैयार है, मुठ काहे मारता है?

तभी उसका वीर्य निकल पड़ा और उसने अपने रूमाल से लण्ड साफ़ कर लिया। अब वो
कम्प्यूटर बंद करके घर जाने की तैयारी कर रहा था। मैं फ़ुर्ती से लपक कर अपने
कमरे में चली आई। उसने कमरा बन्द किया और बाहर चला गया।

उसके जाते ही मेरे खाली दिमाग में सेक्स उभर आया। मेरा जिस्म जैसे तड़पने लगा।
मैंने जैसे तैसे बाथरूम में जा कर चूत में अंगुली डाल कर अपनी अग्नि शान्त
की। पर दिल में मोनू का लण्ड मेरी नजरों के सामने से नहीं हट पा रहा था। सपने
में भी मैंने उसके लण्ड को चूस लिया था। अब मोनू को देख कर मेरे मन में वासना
जागने लगी थी। मुझे लगा कि सोनू को भी कोई लड़की चोदने के लिये नहीं मिल रही
है, इसीलिये वो ये सब करता है। मतलब उसे पटाया जा सकता है। सुबह तक उसका लण्ड
मेरे मन में छाया रहा। मैंने सोच लिया था कि यूं ही जलते रहने से तो अच्छा है
कि उसे जैसे तैसे पटा कर चुदवा लिया जाये, बस अगर रास्ता खुल गया तो मजे ही
मजे हैं।

मोनू सवेरे ही आ गया था। वो सीधे कम्प्यूटर पर गया और उसने कुछ किया और जाने
लगा। मैंने उसे चाय के लिये रोक लिया। चाय के बहाने मैंने उसे अपने सुडौल
वक्ष के दर्शन करा दिये। मुझे लगा कि उसकी नजरें मेरे स्तनों पर जम सी गई थी।
मैंने उसके सामने अपने गोल गोल चूतड़ों को भी घुमा कर उसका ध्यान अपनी ओर
खींचने की कोशिश की और मुझे लगा कि मुझे उसे आकर्षित में सफ़लता मिल रही है।
मन ही मन में मैं हंसी कि ये लड़के भी कितने फ़िसलपट्टू होते हैं। मेरा दिल बाग
बाग हो गया। लगा कि मुझे सफ़लता जल्दी ही मिल जायेगी।

मेरा अन्दाजा सही निकला। दिन में आराम करने के समय वो चुपके से आ गया और मेरी
खिड़की से झांक कर देखा। उसकी आहट पा कर मैं अपना पेटीकोट पांवों से ऊपर
जांघों तक खींच कर लेट गई। मेरे चिकने उघाड़े जिस्म को वो आंखे फ़ाड़-फ़ाड़ कर
देखता रहा, फिर वो कम्प्यूटर के कमरे में आ गया। ये सब देख कर मुझे लगा
चिड़िया जाल में उलझ चुकी है, बस फ़न्दा कसना बाकी है।

रात को मैं बेसब्री से उसका इन्तज़ार करती रही। आशा के अनुरूप वो जल्दी ही आ
गया। मैं कम्प्यूटर के पास बिस्तर पर यूँ ही उल्टी लेटी हुई एक किताब खोल कर
पढने का बहाना करने लगी। मैंने पेटीकोट भी पीछे से जांघो तक उठा दिया था।
ढीले से ब्लाऊज में से मेरे स्तन झूलने लगे और उसे साफ़ दिखने लगे। ये सब करते
हुये मेरा दिल धड़क भी रहा था, पर वासना का जोर मन में अधिक था।

मैंने देखा उसका मन कम्प्यूटर में बिलकुल नहीं था, बस मेरे झूलते हुये सुघड़
स्तनों को घूर रहा था। उसका पजामा भी लण्ड के तन जाने से उठ चुका था। उसके
लण्ड की तड़प साफ़ नजर आ रही थी। उसे गर्म जान कर मैंने प्रहार कर ही दिया।

"क्या देख रहे हो मोनू...?"

"आं ... हां ... कुछ नहीं रीता आण्टी... !" उसके चेहरे पर पसीना आ गया था।

"झूठ... मुझे पता है कि तुम ये किताब देख रहे थे ना ......?" उसके चेहरे की
चमक में वासना साफ़ नजर आ रही थी।

वो कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और मेरे पास बिस्तर के नजदीक आ गया।

"आण्टी, आप बहुत अच्छी हैं, एक बात कहूँ ! आप को प्यार करने का मन कर रहा
है।" उसके स्वर में प्यार भरी वासना थी।

मैंने उसे अपना सर घुमा कर देखा,"आण्टी हूँ मैं तेरी, कर ले प्यार, इसमे
शर्माना क्या..."

वो धीरे से मेरी पीठ पर सवार हो गया और पीछे से लिपट पड़ा। उसकी कमर मेरे
नितम्बो से सट गई। उसका लण्ड मेरे कोमल चूतड़ों में घुस गया। उसके हाथ मेरे
सीने पर पहुंच गये। पीछे से ही मेरे गालों को चूमने लगा। भोला कबूतर जाल में
उलझ कर तड़प रहा था। मुझे लगा कि जैसे मैंने कोई गढ़ जीत लिया हो।
मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर ली, उसका लण्ड गाण्ड में फ़िट करने की उसे
मनमानी करने में सहायता करने लगी।

"बस बस, बहुत हो गया प्यार ... अब हट जा..." मेरा दिल खुशी से बाग बाग हो गया
था।

"नहीं रीता आण्टी, बस थोड़ी सी देर और..." उसने कुत्ते की भांति अपने लण्ड को
और गहराई में घुसाने की कोशिश की। मेरी गाण्ड का छेद भी उसके लण्ड को छू गया।
उसके हाथ मेरी झूलती हुई चूंचियों को मसलने लगे, उसकी सांसें तेज हो गई थी।
मेरी सांसे भी धौकनीं की तरह चलने लगी थी। दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। लगा
कि मुझे चोद ही डालेगा।

"बस ना... मोनू ...तू तो जाने क्या करने लगा है ...ऐसे कोई प्यार किया जाता
है क्या ? ...चल हट अब !" मैंने प्यार भरी झिड़की दी उसे। वास्तव में मेरी
इच्छा थी कि बस वो मुझे पर ऐसे ही चढ़ा रहे और अब मुझे चोद दे... मेरी झिड़की
सुन कर वो मेरी पीठ पर से उतर गया। उसके लण्ड का बुरा हाल था। इधर मेरी
चूंचियां, निपल सभी कड़क गये थे, फ़ूल कर कठोर हो गये थे।

"तू तो मेरे से ऐसे लिपट गया कि जैसे मुझे बहुत प्यार करता है ?"

"हां सच आण्टी ... बहुत प्यार करता हूँ..."

"तो इतने दिनों तक तूने बताया क्यों नहीं?"

"वो मेरी हिम्मत नहीं हुई थी..."उसने शरमा कर कहा।

"कोई बात नहीं ... चल अब ठीक से मेरे गाल पर प्यार कर... बस... आजा !" मैं
उसे अधिक सोचने का मौका नहीं देना चाहती थी।

उसने फिर से मुझे जकड़ सा लिया और मेरे गालों को चूमने लगा। तभी उसके होंठ
मेरे होठों से चिपक गये। उसने अपना लण्ड उभार कर मेरी चूत से चिपका दिया।

मेरे दिल के तार झनझना गये। जैसे बाग में बहार आ गई। मन डोल उठा। मेरी चूत भी
उभर कर उसके लण्ड का उभार को स्पर्श करने लगी। मैंने उसकी उत्तेजना और बढ़ाने
के लिये उसे अब परे धकेल दिया। वो हांफ़ता सा दो कदम दूर हट गया।

मुझे पूर्ण विश्वास था कि अब वो मेरी कैद में था।

"मोनू, मैं अब सोने जा रही हूं, तू भी अपना काम करके चले जाना !" मैंने उसे
मुस्करा कर देखा और कमरे के बाहर चल दी। इस बार मेरी चाल में बला की लचक आ गई
थी, जो जवानी में हुआ करती थी।

कमरे में आकर मैंने अपनी दोनों चूंचियाँ दबाई और आह भरने लगी। पेटीकोट में
हाथ डाल कर चूत दबा ली और लेट गई। तभी मेरे कमरे में मोनू आ गया। इस बार वो
पूरा नंगा था। मैं झट से बिस्तर से उतरी और उसके पास चली आई।

"अरे तूने कपड़े क्यों उतार दिये...?"

"आ...आ... आण्टी ... मुझे और प्यार करो ..."

"हां हां, क्यों नहीं ... पर कपड़े...?"

"आण्टी... प्लीज आप भी ये ब्लाऊज उतार दो, ये पेटीकोट उतार दो।" उसकी आवाज
जैसे लड़खड़ा रही थी।

"अरे नहीं रे ... ऐसे ही प्यार कर ले !"

उसने मेरी बांह पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मुझसे लिपट गया।

"आण्टी ... प्लीज ... मैं आपको ... आपको ... अह्ह्ह्ह्... चोदना चाहता हूं !"
वो अपने होश खो बैठा था।

"मोनू बेटा, क्या कह रहा है ..." उसके बावलेपन का फ़ायदा उठाते हुये मैंने
उसका तना हुआ लण्ड पकड़ लिया।

"आह रीता आण्टी ... मजा आ गया ... इसे छोड़ना नहीं ... कस लो मुठ्ठी में
इसे..."

उसने अपने हाथ मेरे गले में डाल दिये और लण्ड को मेरी तरफ़ उभार दिया।

मैंने उसका कड़क लण्ड पकड़ लिया। मेरे दिल को बहुत सुकून पहुंचा। आखिर मैंने
उसे फ़ंसा ही लिया। बस अब उसकी मदमस्त जवानी का मजा उठाना था। बरसों बाद मेरी
सूनी जिंदगी में बहार आई थी। मैंने दूसरे हाथ से अपना पेटीकोट का नाड़ा ढीला
कर दिया, वह जाने कब नीचे सरक गया। मैंने मोनू को बिस्तर के पास ही खड़ा कर
दिया और खुद बिस्तर पर बैठ गई। अब उसका लौड़ा मैंने फिर से मुठ्ठी में भरा और
उसे आगे पीछे करके मुठ मारने लगी। वो जैसे चीखने सा लगा। अपना लण्ड जोर जोर
से हाथ में मारने लगा। तभी मैंने उसे अपने मुख में ले लिया। उसकी उत्तेजना
बढ़ती गई। मेरे मुख मर्दन और मुठ मारने पर उसे बहुत मजा आ रहा था। तभी उसने
अपना वीर्य उगल दिया। जवानी का ताजा वीर्य ...

सुन्दर लण्ड का माल ... लाल सुपाड़े का रस ... किसे नसीब होता है ... मेरे मुख
में पिचकारियां भरने लगी। पहली रति क्रिया का वीर्य ... ढेर सारा ... मुँह
में ... हाय ... स्वाद भरा... गले में उतरता चला गया। अन्त में जोर जोर से
चूस कर पूरा ही निकाल लिया।

सब कुछ शान्त हो गया। उसने शरम के मारे अपना चेहरा हाथों में छिपा लिया।

मैंने भी ये देख कर अपना चेहरा भी छुपा लिया।

"आण्टी... सॉरी ... मुझे माफ़ कर देना ... मुझे जाने क्या हो गया था।" उसने
प्यार से मेरे बालों में हाथ फ़ेरते हुये कहा।

मैं उसके पास ही बैठ गई। अपने फ़ांसे हुये शिकार को प्यार से निहारने लगी।

"मोनू, तेरा लण्ड तो बहुत करारा है रे...!"

"आण्टी ... फिर आपने उसे भी प्यार किया... आई लव यू आण्टी!"

मैंने उसका लण्ड फिर से हाथ में ले लिया।

"बस आंटी, अब मुझे जाने दीजिये... कल फिर आऊंगा" उसे ये सब करने से शायद शर्म
सी लग रही थी।

वो उठ कर जाने लगा, मैं जल्दी से उठ खड़ी हुई और दरवाजे के पास जा खड़ी हुई और
उसे प्यार भरी नजरों से देखने लगी। उसने मेरी चूत और जिस्म को एक बार निहारा
और कहा,"एक बार प्यार कर लो ... आप को यूँ छोड़ कर जाने को मन नहीं कर रहा !"

मैंने अपनी नजरें झुका ली और पास में रखा तौलिया अपने ऊपर डाल लिया। उसका
लण्ड एक बार फिर से कड़क होने लगा। वो मेरे नजदीक आ गया और मेरी पीठ से चिपक
गया। उसका बलिष्ठ लण्ड मेरी चूतड़ की दरारों में फ़ंसने लगा। इस बार उसके भारी
लण्ड ने मुझ पर असर किया... उसके हाथों ने मेरी चूंचियां सम्भाल ली और उसका
मर्दन करने लगे। अब वह मुझे एक पूर्ण मर्द सा नजर आने लगा था। मेरा तौलिया
छूट कर जमीन पर गिर पड़ा।

"क्या कर रहे हो मोनू..."

"वही जो ब्ल्यू फ़िल्म में होता है ... आपकी गाण्ड मारना चाहता हू ... फिर चूत
भी..."

"नहीं मोनू, मैं तेरी आण्टी हू ना ..."

"आण्टी, सच कहो, आपका मन भी तो चुदने को कर रहा है ना?"

"हाय रे, कैसे कहूँ ... जन्मों से नहीं चुदी हूँ... पर प्लीज आज मुझे छोड़
दे..."

"और मेरे लण्ड का क्या होगा ... प्लीज " और उसका लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद
में दबाव डाल दिया।

"सच में चोदेगा... ? हाय ... रुक तो ... वो क्रीम लगा दे पहले, वर्ना मेरी
गाण्ड फ़ट जायेगी !"

उसने क्रीम मेरी गाण्ड के छेद में लगा दी और अंगुली गाण्ड में चलाने लगा।
मुझे तेज खुजली सी हुई।

"मार दे ना अब ... खुजली हो रही है।"

मोनू ने लण्ड दरार में घुसा कर छेद तक पहुंचा दिया और मेरा छेद उसके लण्ड के
दबाव से खुलने लगा और फ़क से अन्दर घुस पड़ा।

"आह मेरे मोनू ... गया रे भीतर ... अब चोद दे बस !"

मोनू ने एक बार फिर से मेरे उभरे हुये गोरे गोरे स्तनों को भींच लिया। मेरे
मुख से आनन्द भरी चीख निकल गई। मैंने झुक कर मेज़ पर हाथ रख लिया और अपनी
टांगें और चौड़ा दी। मेरी चिकनी गाण्ड के बीच उसका लण्ड अन्दर-बाहर होने लगा।
चुदना बड़ा आसान सा और मनमोहक सा लग रहा था। वो मेरी कभी चूंचियां निचोड़ता तो
कभी मेरी गोरी गोरी गाण्ड पर जोर जोर से हाथ मारता।

उसक सुपाड़ा मेरी गाण्ड के छेद की चमड़ी को बाहर तक खींच देता था और फिर से
अन्दर घुस जाता था। वो मेरी पीठ को हाथ से रगड़ रगड़ कर और रोमांचित कर रहा था।
उसका सोलिड लण्ड तेजी से मेरी गाण्ड मार रहा था। कभी मेरी पनीली चूत में अपनी
अंगुली घुसा देता था। मैं आनन्द से निहाल हो चुकी थी। तभी मुझे लगा कि मोनू
कहीं झड़ न जाये। पर एक बार वो झड़ चुका था, इसलिये उम्मीद थी कि दूसरी बार देर
से झड़ेगा, फिर भी मैंने उसे चूत का रास्ता दिखा दिया।

"मोनू, बस मेरी गाण्ड को मजा गया, अब मेरी चूत मार दो ..." उसके चहरे पर
पसीना छलक आया था। उसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी। उसने एक झटके से अपना लण्ड
बाहर खींच लिया। मैंने मुड़ कर देखा तो उसका लण्ड फ़ूल कर लम्बा और मोटा हो
चुका था। उसे देखते ही मेरी चूत उसे खाने के लिये लपलपा उठी।

"मोनू मार दे मेरी चूत ... हाय कितना मदमस्त हो रहा है ... दैय्या रे !"

"आन्टी, जरा पकड़ कर सेट कर दो..." उसकी सांसें जैसे उखड़ रही थी, वो बुरी तरह
हांफ़ने लगा था, उसके विपरीत मुझे तो बस चुदवाना था। तभी मेरे मुख से आनन्द
भरी सीत्कार निकल गई। मेरे बिना सेट किये ही उसका लण्ड चूत में प्रवेश कर गया
था। उसने मेरे बाल खींच कर मुझे अपने से और कस कर चिपटा लिया और मेरी चूत पर
लण्ड जोर जोर से मारने लगा। बालों के खींचने से मैं दर्द से बिलबिला उठी। मैं
छिटक कर उससे अलग हो गई। उसे मैंने धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया और उससे
जोंक की तरह उस पर चढ़ कर चिपक गई। उसके कड़कते लण्ड की धार पर मैंने अपनी
प्यासी चूत रख दी और जैसे चाकू मेरे शरीर में उतरता चला गया। उसके बाल पकड़ कर
मैंने जोर लगाया और उसका लण्ड मेरी बच्चेदानी से जा टकराया। उसने मदहोशी में
मेरी चूंचियां जैसे निचोड़ कर रख दी। मैं दर्द से एक बार फिर चीख उठी और चूत
को उसके लण्ड पर बेतहाशा पटकने लगी। मेरी अदम्य वासना प्रचण्ड रूप में थी।
मेरे हाथ भी उसे नोंच खसोट रहे थे, वो आनन्द के मारे निहाल हो रहा था, अपने
दांत भींच कर अपने चूतड़ ऊपर की ओर जोर-जोर से मार रहा था।

"मां कसम, मोनू चोद मेरे भोसड़े को ... साले का कीमा बना दे ... रण्डी बना दे
मुझे... !"

"पटक, हरामजादी ... चूत पटक ... मेरा लौड़ा ... आह रे ... आण्टी..." मोनू भी
वासना के शिकंजे में जकड़ा हुआ था। हम दोनों की चुदाई रफ़्तार पकड़ चुकी थी।
मेरे बाल मेरे चेहरे पर उलझ से गये थे। मेरी चूत उसके लण्ड को जैसे खा जाना
चाहती हो। सालों बाद चूत को लण्ड मिला था, भला कैसे छोड़ देती !

वो भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल रहा था, जबरदस्त ताकत थी उसमें, मेरी चूत में
जोर की मिठास भरी जा रही थी। तभी जैसे आग का भभका सा आया ... मैंने अपनी चूत
का पूरा जोर लण्ड पर लगा दिया... लण्ड चूत की गहराई में जोर से गड़ने लगा...
तभी चूत कसने और ढीली होने लगी। लगा मैं गई... उधर इस दबाव से मोनू भी चीख
उठा और उसने भी अपने लण्ड को जोर से चूत में भींच दिया। उसका वीर्य निकल पड़ा
था। मैं भी झड़ रही थी। जैसे ठण्डा पानी सा हम दोनों को नहला गया। हम दोनों एक
दूसरे से जकड़े हुये झड़ रहे थे। हम तेज सांसें भर रहे थे। हम दोनों का शरीर
पसीने में भीग गया था। उसने मुझे धीरे से साईड में करके अपने नीचे दबा लिया
और मुझे दबा कर चूमने लगा। मैं बेसुध सी टांगें चौड़ी करके उसके चुम्बन का
जवाब दे रही थी। मेरा मन शान्त हो चुका था। मैं भी प्यार में भर कर उसे चूमने
लगी थी। लेकिन हाय रे ! जवानी का क्या दोष ... उसका लण्ड जाने कब कड़ा हो गया
था और चूत में घुस गया था, वो फिर से मुझे चोदने लगा था।

मैं निढाल सी चुदती रही ... पता नहीं कब वो झड़ गया था। तब तक मेरी उत्तेजना
भी वासना के रूप में मुझ छा गई थी। मुझे लगा कि मुझे अब और चुदना चाहिये कि
तभी एक बार फिर उसका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। मैंने उसे
आश्चर्य से देखा और चुदती रही। कुछ देर में हम दोनों झड़ गये। मुझे अब कमजोरी
आने लगी थी। मुझ पर नींद का साया मण्डराने लगा था। आंखें थकान के मारे बंद
हुई जा रही थी, कि मुझे चूत में फिर से अंगारा सा घुसता महसूस हुआ।

"मोनू, बस अब छो ... छोड़ दे... कल करेंगे ...!" पर मुझे नहीं पता चला कि उसने
मुझे कब तक चोदा, मैं गहरी नींद में चली गई थी।

सुबह उठी तो मेरा बदन दर्द कर रहा था। भयानक कमजोरी आने लगी थी। मैं उठ कर
बैठ गई, देखा तो मेरे बिस्तर पर वीर्य और खून के दाग थे। मेरी चूत पर खून की
पपड़ी जम गई थी। उठते ही चूत में दर्द हुआ। गाण्ड भी चुदने के कारण दर्द कर
रही थी। मोनू बिस्तर पर पसरा हुआ था। उसके शरीर पर मेरे नाखूनों की खरोंचे
थी। मैं गरम पानी से नहाई तब मुझे कुछ ठीक लगा। मैंने एक एण्टी सेप्टिक क्रीम
चूत और गाण्ड में मल ली।

मैंने किचन में आकर दो गिलास दूध पिया और एक गिलास मोनू के लिये ले आई।

मेरी काम-पिपासा शान्त हो चुकी थी, मोनू ने मुझे अच्छी तरह चोद दिया था। कुछ
ही देर में मोनू जाग गया, उसको भी बहुत कमजोरी आ रही थी। मैंने उसे दूध पिला
दिया। उसके जिस्म की खरोंचों पर मैंने दवाई लगा दी थी। शाम तक उसे बुखार हो
आया था। शायद उसने अति कर दी थी...।

Sunday, 28 July 2013

सेक्स का कीडा

मेरा नाम राज है।तब मेरी उम्र १९ वर्ष थी मेरे अन्दर सेक्स का कीडा
भडक रहा था। मेरी छुटि्टयॉ चल रही थी। हमारे घर के सामने वाले घर मे एक लड़की
रहती है।उसका नाम पूजा है। हम दोनो बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त हैं। इस बार
मैं द्यर दो सालों के बाद आया था। मतलब की हम दोनो पूरे दो सालों के बाद मिले
थे। और अब वह पहले वाली पूजा नहीं थी अब वह बला की खूबसूरत हो गयी थी।
उसका भरपूर १७ वर्ष के जिस्म ने मेरे अन्दर की आग को और भडका दिया था। उसके
बूब्स काफी बडे थे वो उसकी टाईट टीशर्ट में बिल्कुल गोल दिखते थे जिन्हे
देखकर उन्हे हाथ में पकडने को जी चाहता था। वह अकसर शार्ट डे्रस पहना करती
थी।बचपन में मैने बहुत बार खेलते हुए पूजा के बूब्स को देखा था जो कि शुरू से
ही आम लड़कियों के बूब्स से बड़े थे और कभी कभी छू भी लेता था लेकिन मेरा मन
हमेशा उनको अच्छी तरह दबाने को करता रहता था लेकिन मुझे डर लगता था कि कहीं
वो अपने द्यर वालों न बता दे क्योंकि मेरी उसके बड़े भाई के साथ बिलकुल भी
नहीं बनती थी। वो पूजा को भी मेरे साथ न बोलने के लिये कहता रहता था लेकिन
पूजा हमेशा मेरी तरफ ही होती थी। लकिन अब पूजा बड़ी हो चुकी थी और जवानी उसके
शरीर से भरपूर दिखने लगी थी।मैं उस को चोदने के लिये और भी बेकरार हो रहा था।
लेकिन अब वह पहले की तरह मेरे साथ पेश नहीं आती थी।एसा मुझे इस लिये लगा
क्योंकि वो मेरे ज्यादा पास नहीं आती थी।दूर से ही मुस्करा देती थी।


लेकिन एक दिन मेरी किस्मत का सितारा चमका और मैने पहली बार एसा द्रिष देखा
था।उस दिन मैं तकरिबन ११ बजे सुबह अपनी छत पर धूप में बैठने के लिये गया
क्योंकि उन दिनों सर्दियां थी। मैं अपनी सब से ऊपर वाली छत पर जा कर कुरसी पर
बैठ गया।वहां से सामने पूजा के द्यर की छत बिलकुल साफ दिख रही थी।मैं सोच रहा
था कि पूजा तो स्कूल गयी होगी लेकिन तभी मैने नीचे पूजा की आवाज सुनी मैने
नीचे देखा पूजा के मम्मी पापा कहीं बाहर जा रहे थे। थोड़ देर बाद पूजा अन्दर
चली गयी।मैं सोच रहा था कि आज अच्छा मौका है और मैं नीचे जाकर पूजा को फोन
करने के बारे मे सोच ही रहा था कि मैने देखा पूजा अपनी छत पर आ गयी थी।मैं उस
को छुप कर देखने लगा क्योंकि मै पूजा को नही दिख रहा था।उस दिन पूजा ने शर्ट
और प्जामा पहन रखे थे और ऊपर से जैकिट पहन रखी थी।वह अभी नहाई नही थी।तभी उस
ने धूप तेज होने के बजह से जैकिट उतार दी और कुरसी पर बैठ गयी। उस ने अपनी
टांगे सामने पड़े बैड पर रख ली और पीछे को हो कर आराम से बैठ गयी जिस की बजह
से उस के बड़े बड़े बूब्स बाहर को आ गये थे।

मेरा दिल उनको चूसने को कर रहा था और मैं बड़े गौर से उस के शरीर को देख रहा
था।तभी अचानक पूजा अपने बूब्स की तरफ देखने लगी और उसने अपने हाथ से ठीक करने
लगी।उसके चारों तरफ ऊंची दीवार थी इसलिये उसने सोचा भी नही होगा कि उस को कोई
देख रहा है।उसी व्कत उस ने अपनी शर्ट के ऊपर वाले दो बटन खोल दिये।मेरे को
अपनी आंखो पर विशवास नहीं हो रहा था कि मै यह सब देख रहा हूं। मैने अपने आप
को थोड़ा संभाला। लेकिन तब मैं अपने लण्ड को खड़ा होने से नही रोक पाया जब
मैने देखा कि उस ने नीचे ब्रा नहीं डाला हुआ था और आधे से ज्यादा बूब्स शर्ट
के बाहर थे।मैने अपने लण्ड को बाहर निकाला और मुठ मारने लगा।

जब मैने फिर देखा तो पूजा का एक हाथ शर्ट के अन्दर था और अपने एक मुम्मे को
दबा रही थी और आंखे बन्द कर के मझे ले रही थी ।तभी उस ने एक मुम्मे को बिलकुल
शर्ट के बाहर निकाल लिया जो कि बिलकुल गोल और बहुत ही गोरे रंग का था।उसका
निप्पल बहुत ही बड़ा था जो कि उस समय इरैकट था और हलके भूरे रंग का था। मैं
यह सब देख कर बहुत ही उतेजित हो रहा था और अपनी मुठ मार रहा था। तभी उसने
अपनी शर्ट का एक बटन और खोल दिया और अपने दोनो बूब्स बाहर निकाल लिए। फिर
उसने अपने दोनो हाथों की उगलिुयों से निप्पलस को पकड़ कर अच्छी तरह मसलने
लगी। काफी देर तक वो अपने बूब्स को अच्छी तरह दबाती रही। थोड़ी देर बाद वह
कुर्सी से उठी और बैड पर लेट गयी। एक हाथ से उसने अपने बूब्स दबाने शुरू कर
दिए और दूसरा हाथ उसने अपने पजामे मे डाल लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।

अब उस को और भी मस्ती चड़ने लगी थी और वह अपनी गांड को भी उपर नीचे करने लगी
थी।मैं अभी सोच ही रहा था कि खड़ा हो कर उस को दिखा दूं कि मैं उस को देख रहा
हूं तभी मेरा हाथ मे ही छुट गया और मैं अपने लण्ड को कपड़े से साफ करने लगा।
जब मैने फिर देखा तब तक पूजा खड़ी हो गयी थी लेकिन उसके बूब्स अभी भी बाहर ही
थे और वो वैसे ही नीचे चली गयी। लेकिन फिर भी मै बहुत खुश था लेकिन फिर मेरे
को लगा कि मैने पूजा को चोदने का मौका गवा दिया। मुझे खड़ा हो जाना चाहिए था।
एसा करना था वैसा करना था। तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया। और मैं जलदी से
नीचे गया और पूजा के द्यर फोन कर दिया। पहले तो वह मेरी आवाज सुन कर थोड़ी
हैरान हुई क्योंकि फोन पर हमारी ऐसे कभी बात नही हुई थी लकिन वह बहुत खुश थी।
लेकिन मैं उस से सेक्स के बारे में कोई भी बात नही कर सका। इधर उधर की बातें
करता रहे। उस दिन हम ने २ द्यटें बातें की और फिर उसका भाई विशाल आ गया था।
शाम को उसने मुझे फिर फोन किया और हमने १ द्यटां बति की और फिर रोजाना हमारी
फोन पर बातें होने लगी और द्यर पर भी अकसर आमने सामने हमारी बातें हो जाती
थी। छत पर भी हम एक दूसरे को काफी काफी देर देखते रहते थे। लेकिन मेरे को
उसके भाई से बहुत डर लगता था इस लिए जब वह द्यर पर होता था मै पूजा से दूर ही
रहता था।

एक बार विशाल की बजह से हमारी पूरे २ दिन बात नही हुई और हम दोनो बहुत परेशान
थे और हम छत पर भी नही मिल पाए और विशाल ने उस को हमारे द्यर भी नहीं आने
दिया था। उस दिन मैं पूरा दिन बहुत परेशान रहा क्योंकि पूजा मुझे सिर्फ एक
बार दिखी थी और हमारी बात भी नही हुई थी।रात के ९ बज चुके थे। मै बैठा पूजा
के बारे मे सोच रहा था।तभी बाहर की द्यटीं बजी। जब मैने गेट खोला तो देखा
बाहर पूजा खड़ी थी।

उसने मुझसे सिर्फ यह कहा "आज रात साढ़े बारह मै फोन करूंगी रजत मेरा मन नहीं
लग रहा है " और वापस चली गयी।

मैं एक दम से हैरान रह गया। मुझे विशवास नही हो रहा था। लेकिन मै बहुत खुश
था। पहली बार किसी से रात को बात करनी थी। गेट बन्द करके अन्दर गया और मम्मा
से कहा पता नही कौन था द्यटीं बजा कर भाग गया। ११ बजे सभी सो गए लेकिन मुझे
नींद कैसे आ सकती थी।मैने दूसरे फोन की तार निकाल दी थी और अपने कमरे वाले
फोन की रिंग बिलकुल धीमी कर दी थी और कमरे का दरवाजा भी बन्द कर लिया था।
तकरीबन १२:३५ पर फोन आया और पूजा बहुत ही धीमे स्वर मे बोल रही थी और उसने
बताय्या कि "विशाल ने हम दोनो को बात करते हुए देख लिया था।इसलिए उसने मुझे
तुमसे मिलने और फोन पर बात करने से मना किया है वह कहता है कि तुम अच्छे
लड़के नहीं हो। लेकिन मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो। तुमसे बात करके बहुत
अच्छा लगता है। मै तुम से बात किए बगैर नही रह सकती। इसलिए रजत हम रात को बात
किया करेंगे और इस समय हमें कोई डिसटर्ब भी नही करेगा खास कर विशाल"

ऐसे ही हमारी बहुत देर बातें होती रहीं और अब पूजा पूरी तरह मेरे जाल मे फस
चुकी थी। तब मैने पूछा कि तुम कमरे मे अकेली ही हो न इतनी धीमे क्यों बोल रही
हो। उस ने कहा कि मेरे कमरे का दरवाजा खुला है और मम्मी पापा साथ वाले कमरे
मे हैं। तो मैने उसको दरवाजा बन्द करने को कहा। उसने पूछा क्यों तो मैने कहा
कि उसके बाद मैं तुम्हारे पास आजाऊंगा बैड के उपर बिलकुल तुम्हारे साथ। तो वह
कहने लगी नहीं मुझे तुमसे डर लगता है। तुम मेरे साथ कुछ कर दोगे। तब मैने
उससे कहा कि मै कभी तुम्हारे साथ जबरदसती नही करूंगा। जो तुम्हे अच्छा लगेगा
हम वह ही करेंगे। मैने पूजा को अपना हाथ पकड़ाने के लिए कहा।

उसने कहा "पकड़ लो लेकिन आराम से पकड़ना" थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा
"तुम्हारे हाथ पकड़ने से रजत मेरे को कुछ हो रहा है प्लीज अभी मेरा हाथ छोड़
दो"

मैने कहा ठीक है छोड़ देता हूं। लेकिन पूजा मैं तुम से लड़कियों के बारे मे
एक बात पूछना चाहता हूं। बताओगी।

उसने कहा "पूछो क्या पूछना चाहते हो।"

मैने हिचकचाते हुए कहा मैं पिरीअडज के बारे मे सब कुछ जानना चाहता हूं। पहले
पूजा चुप कर गई लेकिन थोड़ी देर बाद उसने मुझे सब कुछ बतायया और उसके बाद
हमारी सेक्स के बारे मे बातें शुरू हो गई। मैने उसको कहा कि मैने उसके बूब्स
देखे हैं। तो उसने कहा आप झूठ बोल रहे हो। तब मैने छत वाली बात बता दी कि मै
सब कुछ देख रहा था। वह थोड़ा शरमा गई और कहने लगी कि आप बहुत खराब हो। उसने
कहा कि ऐसा करने से उसको मजा आता है। थोड़ी देर बाद उसने कहा कि जब मैने पहले
उसका हाथ पकड़ा था तब उसकी टांगो के बीच में कुछ हो रहा था उसको बहुत मजा आ
रहा था और उसकी चूत में से बहुत पानी निकल रहा था जिस की बजह से वह द्यबरा गई
थी और इसी लिए उसने मुझे हाथ छोड़ने को कहा था।

तब उसने फिर से हाथ पकड़ने को कहा। मैने कहा ठीक है पकड़ा दो। थोड़ी देर बाद
उसने कहा कि उसकी पैंटी चूत के पानी से बिलकुल गीली हो गई है और उसके निप्पलज
भी बिलकुल इरैकट हो गए हैं।तब मैने उसको अपने कपड़े उतारने को कहा।तब उसने उठ
कर दरवाजा बन्द कर लिया और सारे कपड़े उतार दिए।फिर उसने बूब्स दबाने शुरू कर
दिए और सेक्सी सेक्सी आवाजें निकालने लगी।मेरा लण्ड भी बिलकुल खड़ा हो चुका
था।तब पूजा अपनी उंगली से चूत के ऊपर क्िलटरीज को दबाने लगी और फिर उसने
उंगली चूत के अन्दर डाल ली।

उसके मुंह से आवाजें आ रही थी।आहहहहहहहहहहहहहहह आह आहहहह वह कह रही थी " रजत
प्लीज चोदो मेरे को।अपना लण्ड मेरी चूत मे डालो।मेरे मुम्मों को चूसो।जोर जोर
से चोदो मेरे को।"

उस रात हमने सुबह ५ बजे तक बात की।उसको बाद हम अकसर रात को बातें करते
थे।लेकिन मैं उस दिन के इंतजार मे था जिस दिन मै उसको असली मे चोदूं। आखिर वह
दिन आ ही गया जब मेरा सपना सच हो गया। पूजा के एक रिश्तेदार अचानक बीमार हो
गये उसके मम्मी और पापा को उन्हें देखने के लिये जाना पडा। और किसी भी हालत
में उनके तीन दिन तक लौटने कि कोई उम्मीद नही थी।विशाल दिन भर दुकान पर
था।पूजा द्यर मे अकेली थी। लेकिन मम्मा की बजह से मै उससे बात नहीं कर पा रहा
था। मैं अपने कमरे मे चला गया।

मैंने एक सेक्स मैगजीन निकाला और देखने लगा। उसमें कुछ आपत्तिजनक तस्वीरे थी।
मैं उन्हें देख रहा था तभी अचानक पीछे से पूजा आ गई उसने पूछा क्या देख रहे
हो और वह मेरे बेड पर बैठ गयी।मैने पूछा कि मम्मा से क्या कहा है तब उसने कहा
कि आन्टी ने उसको जहां आते हुए नही देखा।तभी मैं उठा और मम्मा से कहा कि मैं
सोने लगा हूं और मैने दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया।फिर मैने उसके सामने वह
किताब रख दी वह उसे देखने लगी। फिर हम दोनो सेक्स के बारे में बातें करने
लगे। मैं उठकर उसके पीछे खडा हो गया मैने उसके कन्धे पर अपना हाथ रखा और
झुककर उसके कन्धों को चूम लिया। उसने कुछ भी प्रतिरोध नहीं किया यह मेरे लिये
बहुत था।

मै उसके सामने बैठ गया और उसके होठो को चूम लिया। मेरा हाथ तेजी से उसकी कमर
में पहुॅच गया और कसकर पकडकर उसे अपनी ओर खींच लिया। मेरे हाथ उसके बूब्स पर
पहुॅच गया और ऊपर से ही दबाने लगा।

उसके मॅुह से प्रतिरोध के शब्द निकले उसके मुॅह से निकला ओहहहहहहहहहहह नहीं
बस करो रजत।

लेकिन उसके हाथो ने उतना एतराज नहीं जताया। उसने एक ढीली ढाली टीशर्ट और
साइकलिंग शार्ट पहन रखा था। मेरा हाथ उसकी टीशर्ट के अन्दर उसकी ब्रा के ऊपर
से ही उसके उभारों को दबाने लगा। मेरी जीभ उसके मुॅह में द्यूम रही थी। अब
उसके तरफ से भी सहयोग मिलने लगा था। मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी उसने पहले ना
नुकुर की लेकिन मेरे हाथ का जादू उसके दिलो दिमाग पर छा रहा था। उसका
प्रतिरोध नामात्र का था। मैं उसके बूब्स को उसकी ब्रा के ऊपर से ही मुॅह मे
लेने लगा। और मेरा दूसरा हाथ उसकी जांद्यो के बीच के भाग को उसके कपडो के ऊपर
से ही सहलाने लगा। मेंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया उसका भरपूर यौवन मेरे
सामने था। जिनको मैंने बिना एक पल की देरी किये अपने मुॅह में ले लिया। वह
अपने वश में नहीं थी उसने मुझे कसकर पकड लिया।

मैने उसके बाकी बचे कपडो को उतार फेंका और उसे बेड पर लिटाया। मैंने अभी तक
अपने कपडे नहीं उतारे थे मैने अपने कपडे उतार दिये । मैं अब सिर्फ अन्डरवियर
में था।और उसके ऊपर वापस झुक गया। और उसके निप्पल को मुॅह में ले कर चूसने
लगा। मेरे हाथ उसकी जांद्यो के बीच की गहराइयों तक पहुॅच गये और उसके जननांग
को सहलाने लगे। उसने अपना हाथ मेरी अन्डरवियर में डालकर मेरे हथियार को बाहर
निकाल लिया। मैं नीचे गया और अपने होठ उसके जननांगों पर रख दिये उसके मुॅह से
एक सीत्कार निकल पडी। उसने मुझे अपने पैरो में फॅसा लिया। मेरी जीभ उसकी चूत
के अन्दर बाहर हो रही थी। उसने पानी छोड दिया मेरी जीभ को नमकीन स्वाद आने
लगा। उसने मेरे लण्ड को अपनी चूत में डालने के लिये मुझे ऊपर की ओर खींच
लिया। और बोलने लगी प्लीज इसे अन्दर डालो अब बरदाश्त नहीं होता।

मैंने एक पल की भी देरी नहीं की उसके टांगो को फैलाया और अपने लण्ड को उसके
चूत के ऊपर रखा । एक धीमा सा धक्का दिया वह पहले झटके को आसानी से सहन नहीं
कर पायी और दर्द से कराह उठी और चिल्लाने लगी ़़़़ ज़ल्दी निकालो मैं मर
जाऊॅगी। मैंने उसको कस कर पकडा और उसके निप्पल को मुॅह में लेकर अपनी जीभ से
चाटने और दांतों से काटने लगा। थोडी देर में ही वह अपनी कमर को आगे पीछे
हिलाने लगी। मेरा लण्ड जो कि अभी तक रमा की चूत के अन्दर ही था और बडा होने
लगा था। मेरे लिये अब यह पल बरदाश्त के बाहर था। मैंने भी आगे पीछे जोरो से
धक्के लगाने लगा। मेरी स्पीड लगातार बढ़ती रही उधर उसके मुॅह से उत्तेजित
स्वर और तेज होते रहे। और थोडी देर में हम दोनो अपनी चरम सीमा पर पहुॅच गये
फिर वासना का एक जबरदस्त ज्वार आया और हम दोनो एक साथ बह गये।

मैं उसके ऊपर ही लेटा रह गया। उसने मुझे कसकर पकड रखा था। थोडी देर में मैं
मुक्त था। पूजा छुप कर अपने द्यर चली गई।बाद दुपहर जब विशाल खाना खा कर वापस
दुकान पर चला गया मैं मम्मा से यह कह कर कि मै अपने दोसत के द्यर जा रहा हूं
पूजा के द्यर चला गया। फिर हमने शाम तक एक दूसरे के साथ सेक्स किया इक्कठे
नहाए और पूजा ने मेरे लण्ड को अपने मुंह मे डाल कर खूब चूसा और उसको लण्ड को
चूसने में ब्हुत ही मजा आ रहा था। शाम को जब मैं जाने लगा तो उसने कहा के आज
रात को वह मेरे साथ सोना चाहती है।मैने कहा यह कैसे हो सकता है। उसने कहा कि
आज रात को वह नीचे अकेली होगी और उसने कहा कि ११ बजे बाहर आ जाना वह गेट खोल
देगी। रात को मैं ११ बजे मैं छोटे गेट से उसको बाहर से ताला लगाकर पूजा के
द्यर के बाहर गया तब उसने गेट खोल दिया और मै अन्दर चला गया।पूजा गेट बन्द
करके अन्दर आ गई।

मैने पूछा विशाल सो गया क्या ।उसने कहा कि विशाल तो एक द्यंटे से सोया हुआ
है।तब मैने पूछा कि वह क्या कर रही थी। उसने कहा " आप से अच्छी तरह चुदने की
तैयारी कर रही थी।"

वह मेरे को अपने मम्मी पापा के बैडरूम मे ले गई और आप बाथरूम मे चली गई।
थोड़ी देर बाद जब वह बाहर आई उसने छोटी सी नाईटी जो कि बिलकुल पारदरशी थी
पहनी हुई थी। उसने नीचे कुछ भी नही पहना हुआ था। उसके मुम्मे और चूत दिख रहे
थे। उसने कहा के यह नाईटी मम्मा की है और आज वह मम्मा की तरह ही चुदना चाहती
है तब मैने पूछा कि मम्मा की तरह का क्या मतलब है। तो उसने कहा कि एक रात वह
बाथरूम जाने के लिए उठी तो उसने देखा कि मम्मी पापा के रूम की लाईट जल रही
थी। उसने खिड़की मे से देखा तो मम्मा ने यह ही पहनी हुई थी। उसके बाद उसने २
द्यंटे मम्मा को पापा से चुदते देखा।

थोड़ी देर बाद मैने देखा कि पूजा ने सारे बाल साफ कर हुए थे।उसके बाद हम फिर
से एक दूसरे के लिए बिलकुल तैयार थे।उस रात सुबह ५ बजे तक बिलकुल नन्गे एक
दूसरे की बाहों मे रहे और इस बीच मैने उसको तीन बार चोदा।उसने मेरे लण्ड को
बहुत चूसा। अगले दो दिन भी हम ऐसे ही एक दूसरे की बाहों मे मजे करते रहे। अब
हमें जब भी मौका मिलता है हम इसका आनन्द उठाते हैं।